Thursday, March 27, 2008

black & white

मैंने लास्ट वीक ब्लैक & व्हाइटd मूवी देखि तब एहसास हुआ की मेरी सोच मुस्लिम्स के लिए काफी हद तक ग़लत है। पर बचपन से ही हम यह देखते और सुनते आए हैं की हिंदू और मुस्लिम्स बड़े दुश्मन है। इस मूवी ने मुझे सोचने पे मजबूर कर दिया की कुछ लोग है जो यह हिंदू मुस्लिम दंगे करवा कर हमारी युवे पीढ़ी के मॅन में कितना ज़हर घौल रहे है।

इस मूवी में प्यार की भावना को बहुत सुंदर और मन् को छु जाने वाली भांति पेश किया है। मुझे अपनी सोच पर शर्म आई। हाँ पर इसका मतलब यह नही की मेरी पुरी सोच बदल गई, पर मुझे सोचने का एक नया नज़रिया ज़रूर मिला। नाव आई थिंक हम कभी कबार कितना स्तुपिद सोचते है! इतनी फास्ट लाइफ में जब हमें प्यार के लिए वक़्त नही, हम यह हेट और दुश्मनी जैसे व्यर्थ इमोशंस पर टाइम वेस्ट करते है।

अब मैंने फ़ैसला लिया है की सिर्फ़ कुछ सेल्फिश और मक्कार लोगों की वजह से में पुरी एक जाती के खिलाफ नही रहूंगी। वे भी उतने ही इंसान है जितने हम, उन्हें भी मार पड़ ने पर उतना ही लगता है जितना हमें।
काश ऐसा हो की हमारी पुरी पीढ़ी यह सारी कास्ट, रेस, कलर, क्रिद सब भूल जाए और हम एक होकर बिना किसी खौफ और डर के जिए।

न कोई सरहद या न कोई रोक हो! जो जब चाहे, जहा चाहे आ जा सके। और यह सिर्फ़ इंडिया में नही पुरी दुनिया में हो। हम इंडियन नाशनाल्स की जगह वर्ल्ड सितिजेंस के जैसे जिए।
आई ऍम श्योर ऐसा बहुत जल्द होगा और हमारी दुनिया एक परियों के देश सी होगी, जहा हर जगह सिर्फ़ खुशी और प्यार होंगे।